शक्ति

तेरे द्वारे

तेरे द्वारे

तेरे द्वारे   भक्ति भाव मे विहल मन को जब मनवांक्षित फल नही पाता है जो वह उद्दीग्न हो जाता है फिर मन की अपनी ही गति परिलक्षित होने लगती है। भक्त लगातार अपने मन पर नियंत्रण की कोशिश करता रहता है। इन्ही कोशिश मे उसे लगता है कि उसको किसी सहारे कि जरुरत है तो वह अपने आराध्य की ओर ध्यान करता है। अपने आराध्य की ध्यान को अपनी ओर करने के लिए वह स्वयं की भाव भंगिमा मे वशिभुत कर लेता है जिससे की भाव प्रधान मन की उदिग्नता शरीरिक रुप सज्जा मे विघटित होकर एक उन्नत विचार…
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शक्ति कलश

शक्ति कलश

शक्ति कलश एकात्म बिचार से लोगों को जोड़ने के लिए हिन्दु जनमानस को यज्ञ के माध्यम से उत्साहित किया जाने वाले ये कार्यक्रम गायात्री परिवार की एक महत्वकांक्षी योजना है। धार्मिक उत्सव से जन आन्नदोलन के द्वारा वर्गिकृत समाज को एक पटल पर लाकर विकास की प्रक्रिया को उच्चतम स्तर पर ले जाने का ये प्रयास लगातार चल रहा है।     शक्ति कलश की यात्रा से यज्ञ की शुरुआत किया जाता है लोगों के भावनाओ को नये सिरे से सुत्रवद्ध करते हुए जीवन मे आगे बढ़ने के गुण को नवीकृत करके बिचारोन्नमुख से उत्साहवर्धन का योग गुणकारी है। संबंधित लेख…
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