Bhabhi

भाभी के साथ रंग

भाभी के साथ रंग

भाभी के साथ रंग होली हिन्दुओ का एक प्रसिद्ध पर्व है जिससे आपसी बिद्वेश को कम करने के रुप मे देखा जाता है। इससे एक पौराणिक कथा भी जुड़ा हुआ है। जिसमे होलिका का अंत हो जाता है तथा प्रहलाद को जिवन दान मिलता है। व्यवहारिक रुप मे होली आपसी भेदभाव को मिटाने का माध्यम है। रिस्ते की बात की जाती है, तो देवर भाभी के रिस्ते का नोक-झोक देखते ही बनता है। इसी भाव के व्यक्त करता यह काव्य रचना पुरी रंग मे रचा गया है। आजकल हमारा नजरीया खुलापन के साथ आपसी विश्वास को दर्शाता है, जो रिस्ते…
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प्यारी भाभी

प्यारी भाभी

देवर भाभी का आधुनिक समाज मे रिस्ते मे तल्खी देखने को मिलती है। बिज्ञान के विकाश के साथ ही बिश्वास की अवधारणा भी बदलने लगा है। रामायण काल के सामाज मे भाभी को मां का दर्जा दिया जाता था। लेकिन महाभारत मे इसकी परिभाषा बदल गई। द्रौपदी पाँच भाई से शादी करके इस रिस्तो को नया मुकाम दिया। आधुनिक काल मे मानव समाज के नित्य बदलते व्यवहार से नयी नयी सोच के साथ रिस्तो को टुटते बनते देखते है। लेकिन आज भी एक स्वस्थ्य समाज मे देवर भाभी के अनेखे रिस्ते देखने को मिलता है। परिवार को राष्ट्र के विकाश…
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