करोना बम

करोना बम

कोरोना बम

कोरोना की महामारी जिस तरह से वैश्विक स्तर पर तवाही मचाई उससे ये कहा जाने लगा कि करोना का उपयोग विश्विक इकोनोमी को प्रभावित करने को लेकरके किया गया एक साजिस है। इस पर एक लम्बी वहस की प्रक्रिया चली। कोरोना को रोकने के ततकालिक किये जा रहे उपाय असफल सावित हो रहे थे। विश्व के लगभग सभी देश इस समस्या से प्रभावित रहे। वहुत सारे देश ने अपने इकोनोमी को बचाने के लिए बहुत नुकसान सहा। वहां पर लोगो की मौत का आंकड़ा बढ़ता गया पर कार्य को एक स्तर तक बनाये हुए रखा गया तथा वैक्सिन के माध्यम से इसे नियंत्रित करने की कोशीश कि गई। देर हुई पर लोगो को अंततः राहत मिली।

कोरोना की भायवहता इतनी थी की ये विमारी सांस के जरीये एक व्यक्ति से दुसरे मे फैल जाता था। कई जगह तो इसके फैलने के वजह को हवा मे छोड़े गये सांस के बाद दुसरे व्यक्ति को वहां पर आने से होने की बात भी कही गई जो कि इसके भयावहकता को दर्शाता है। करोना विमारी के दौराण होने वाली मौत को लेकरके ये कहा जाने लगा की इसका इस्तेमाल बम कि तरह हुआ। जिसमे की भी तरकीव कामयाव नही होती है। यदी एक बार इसको रोकना संभव नही हुआ तो इससे नुकसान होता ही है। करोना को इसी रुप से आंका गया।

मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना के पिछे के कारण को अनुमान तो लगाया गया पर प्रत्यक्ष रुप से किसी व्यक्ति को आरोपित मानकर उसपर कार्यवाही की वात नही हो पाई। इसको पता लगाने के लिए अंतरराष्ट्रिय स्तर पर काफी प्रयास किये गये, लेकिन जानकारी और अनुमान के सिवाय कुछ नही मिला। विना किसी ठोस सबुत के इसको जहां से फैला तो उसको जिम्मेदार मानते हुए ये कहा गया ही इसका इस्तेेमाल बम कि तरह किया गया।

बैक्सिन और एम्युन पावर दोने मिलकर इस समस्या का सामाधान खोज निकाला। मानव समाज खुद को आगे बढ़ने के लिए लगतार प्रयास करता रहता है लोकिन आंतरिक रनजिस के तरह जो प्रतिस्पर्धा से जो लोग गलत तरीके अखतिया करते है उनका को देर सवेर नुकसान होता ही है क्योकी मानव के सोच की सिमा निश्चित है वो नही तक अपने को सही सावित कर सकता है लेकिन प्रकृति की विशालता बहुत वड़ी है। इसलिे व्यक्ति को पुरे समाज के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए जिससे की एक उन्नत समाज से समस्त जग का कल्याण हो सके।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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