
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस
बालापन बड़ा ही भोलाभाला होता है। इस दौर मे देखकर सीखने की प्रक्रिया की प्रवलता रहती है। हर बस्तु के प्रति अपना एक दृष्टिकोण बनाने की नीव परती है। इसी आपाधापी के बीच बढ़ता जीवन बहुत कुछ सीखता है। इसीसे जुड़ी एक दास्तान की कहानी की चर्चा यहां की जा रही है।
जीवन से जुड़ी हर बात को समझने और उसपर अपनी प्रतिक्रिया देने की कला सीखनी होती है। बच्चो का प्राथमिक पाठशाला घर को ही माना जाता है। इसके बाद बच्चों विद्यालय की ओर आगे बढ़ते है। बच्चो के मानसिक विकाश की इस दौर मे उसको उच्च स्तर की समझदारी पैदा करने की जरुरत होती है। इसके लिए उसको शिक्षा की एक व्यवस्था के साथ जोड़ा जाता है। जब बच्चे पुर्ण रुप से विकसित हो जातें है तो उसका मानसिक विकाश पुर्ण हो जाता है जिससे वो जीवन मे आनेवाली गम्भीर चुनौती का सामना आसानी से कर सकते हैं।
जीवनयापन के इस आधुनिक दैर मे लोगो को बड़ी ही मुस्कील का सामना करना पड़ता है वो तब जब आर्थिक स्थिती बहुत कमजोर हो। देखा ते ऐसा भी जाता है की दो वक्त को रोटी का भी जुगाड़ कर पाना कठीन होता है। ऐसी हालत मे भूख को पहली उपचार की प्राथमिकता दी जाती है। इसके तरह बच्चो को श्रम के लिए लगा दिया जाता है। काम देने वाले को भी कम किमत पर ज्यादा देर काम करने वाला बाल श्रमिक मिल जाता है। इस पुरी प्रक्रिया मे बच्चे का बालापन समाप्त हो जाता है। उसका पुरा ध्यान भरण पोषण पर चला जाता है। जिस उम्र मे उसको पठन-पाठन करने की जरुरत है उस उम्र मे वो काम की कठीन कार्य को करने लगता है। इससे उसके आनेवाला जीवन और कठीन हो जाता है। समुचित शिक्षा के अभाव मे उसका जीवन अधुरा रह जाता है। दिमाग रहते हुए भी उसका वास्तविक विकाश नही हो पाता है।
बाल श्रम को रोकने के लिए सरकार कानून भी बना चुकी है। बाल श्रम को रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किये जाते रहे है। समाज की भी जिम्मेदारी है कि इस कार्य के प्रति समाज के दवे कुचले लोगो तक इस बात को पहुँचाये और समाज को उन्नती की राह की ओर अग्रसर करे। समाज के विकाश से ही देश के उन्नती के रास्ते बनते है। इसके लिए सबसे निचे स्तर पर सुधार की जुरुरत महसुस की जाती है। वैश्विक स्तर पर भी इस कार्य के करने के लिए लगातार प्रयास चलते रहते है। इसी के लिए ये दिवस काफी महत्वपुर्ण है।
भारत एक विकाशशील देश है यहां के लोग काफी मेहनती होते है। इस मेहनत मे उनके भरण-पोषण का पुरा भार छुपा होता है। जो गरीब देश है उसकी आर्थिक हालत बहुत दैनिए है वहां बड़े मुश्लिक से लोगों का भरण-पोषण हो पाता है। इस तरह की समस्या का सामना कर रहे देश को मानवता के आधार पर आर्थिक मदद की जुरुरत है जिससे की उसके उन्नती का रास्ता बना सके और एक सुखद भविश्य की ओर देख सके।
इस धरती पर खादान्न का वितरण एक समान नही है। खादान्न उत्पादित करने वाले देश और व्यपार करने वाले देश की जिम्मेदारी ज्यादा होती है कि इस तरह के दवे कुचले देश की सुरक्षा के लिए आगे आये। उसको भी विकाश की ओर अग्रसर कराया जाय। यहां श्रम आसानी से मिल जाता है जिससे उत्पादित बस्तु की किमत भी कम होती है और बाजार पर भी पकर अच्छी होती है। इस लिए इसका उपयोग किया जाना चाहिए।
हम अशा करते है की बाल श्रम के निषेध के लिए जागरुक लोग आगे आयेगे और इस अभियान को पुरा करेगें इससे राष्ट्र की मजबुती मे एक मजबुत कदम माना जायेगा। अपने आस परोस के लोग जिनकी समझ उच्च स्तर की नही है उसको सहयोग की जरुरत है तो ऐसे लोग भी आगे आयेंगे जो उनकी आर्थिक मदद करेगें जिससे की उसका वास्तविक विकाश हो सके और वो भी विकाश की धारा मे सामिल हो सके। जय हिन्द
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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