
अंतर्राष्ट्रीय परिवार प्रेषण दिवस
वैश्विक बाजार के सुदृढ़ होने के कारण देश विदेश की सिमायें व्यपार के लिए खुलने लगी है। पहले अधिकांश लोग देश के अंदर ही रोजगार की तलाश मे रहते थे और अधिकांश लोगों को रोजगार मिल भी जाता था। लेकिन अब जब वैश्विक बाजार का स्तर लगातार उँचा हो रहा है लोग विदेश जाकर रोजगार की तलाश करने लगे है। जिसको जहां अपनी व्यवस्था अच्छी लगती है वह वहां पर स्थिर हो जाता है। इस तरह से व्यपार का एक नया स्वरुप देखने को मिल रहा है।
अब अर्जित की हुई राशि को अपने स्वदेश की ओर भेजने की व्यवस्था भी करनी होती है। इस व्यवस्था के तरह प्रत्येक देश मे वहां की स्थानीय करेंसी को बदलने की एक प्रक्रिया होती है इस प्रक्रिया के तरह एक देश की करेंसी को दुसरे देश की करेंसी मे बदला जाता है। इस लेन देन को आसान बनाने के उदेश्य से ही आज का विशेष दिवस मानाया जा रहा है। लोगो मे इस बात की जागरुकता फैलाने के लिए की जो जिस देश मे हो उसके अपने स्वदेश मे राशि भेजने मे किसी तरह की कोई परेशानी का सामना करना नही परे।
जगरुकता ही परेशानी को कम करता है। एक जनजागरण व्यवस्था के तहत यदी कोई परेशानी है तो व्यक्ति को समय से जानाकारी मिलने पर वह इससे आसानी से दुर कर सकता है। यदि कोई व्यक्ति किसी विचौलिये के बीच फंसकर अपना नुकसान कर रहा है तो उसको इस जागरुकता अभियान से लाभ मिल जायेगा। यदि एक उत्तम व्यवस्था की सुत्रपात होती है तो इससे लेन-देन आसान हो जायेगा। यदि कोई बाधा है तो उसकी भी जानकारी आसानी से हो जायेगी और एक सुदृढ़ व्यवस्था जन्म लेगी। इस तरह के विचार से समाज मे एक साकारात्मक संदेश जायेगा।
आजकल बढ़ती जनसंख्या और परिस्थितीकी तंत्र का लगातार विगरते बनते रहना एक समस्या उत्पन्न कर रहा है। इस समस्या से निदान पाने के लिए लोग रोजगार की तलाश मे एक स्थान से दुसरे स्थान तक की यात्रा करते है। आदान प्रदान की उत्तम व्यवस्था से जरुरत मंद को जहां पर कार्य मिल जायेगा वही पर दुसरे को सुलभ मे मजदुर मिल जायेगा। इस प्रक्रिया मे अर्जित राशि के स्थानांतरण की जो समस्या थी उसका भी समाधान यदी आसानी से हो जायेगा तो एक उत्तम व्यवस्था बन जायेगी। जिससे की विश्व स्तर मे एकरुपता देखने को मिलेगी।
सारा विश्व अलग-अलग होते हुए भी मानव विकाश के लिए प्रतिबद्ध है। एक दुसरे को किसी न किसी जरुरत के लिए लेन-देन आदान-प्रदान करना होता है। इस व्यवस्था को और गहराई से समझने की जरुरत है जिससे की आपस की समझ को और गहराई मिले। हम एक स्वस्थ्य और उत्तम व्यवस्था के बनाने के लिए 16 जून के इस समय को जागरुकता को लिए सही मान रहे है। इस दिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस विषय की चर्चा होगी और एक उन्नत स्वस्थ्य समाज का निर्माण होगा।
लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु
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