Poem

आनन्द चतुर्दशी

आनन्द चतुर्दशी

आनन्द-चतुर्दशी. इसमे भगवान बिष्णु की पुजा की जाती है। भगवान बिष्णु को प्रतिपालक कहा जाता है। जिव के जिवन का यह सबसे  हमत्वपुर्ण काल होता है, उसका जन्म से मृत्यु तक का समय। इसी समय में वह अपनी कहानी का अंत कर लेता है। इस संसार में व्यवस्थित रुप से रहने के लिए कई प्रकार की वंधन, संयोग, बियोग का निर्माण किया गया है। आपको एक सफल व्यक्ति बनने के लिए सवसे उपयुक्त का चुनाव करना है, जिससे की आपका जिवन सफल हो जाय। यह कठिन कार्य है। पुर्व कर्मो के आधार पर प्राप्त आपका जिवन अपने आयामों के साथ…
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अमेरीका द्वारा अफगानीस्तान को छोड

अमेरीका द्वारा अफगानीस्तान को छोड

अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान को छोडना कर्म प्रधान यह संसार नानाप्राकर के कर्मो मे उलझा रहता है। बहुत सारी घटना एक साथ संपादित हो रही होती है। सबको समझकर उसका समायोजन करना संभव नही होता है। जहां संभावना बनती है, वहां भी ज्ञानी परुष यह कहकर घटना मे हस्ताक्षेप करने से इंकार कर देते है, कि घटना के घटक को अपने कर्मो का फल उसके अनुरुप प्राप्त हो। कभी-कभी हमारे द्वारा किया गया सही कार्य भी समान्य सोच मे नही आ पाता है। और हमारी हमत्ता कम कर आंकी जाती है। अमेरीका द्वारा द्वितीये बिश्व युद्ध मे बिजयी होने के वाद…
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अखण्ड जाप

अखण्ड जाप

अखण्ड जाप  यूँ तो जाप करना हमेशा से लाभकारी रहा है, लेकिन समय के साथ बदलती समाजिक परिवेश ने एक कोलाहल का माहौल बना दिया है। हमारा अस्थिर मन एक समस्या का हल निकालता है, कि वह दुसरे समस्या में  उलझ जाता है। इसका बैधानिक कारण है, मन का स्वस्थ्य नहीं होना। हमारी चाहत तथा उसका समायोजन ही एक समस्या है। हम एक कार्य कर ही रहे है, कि दुसरे के प्रती हमारा ध्यानाकर्षण खिंच जाता है। हमारा नजरीया यहां भी बनने लगता है। इस तरह हम उलझते चले जाते है।           किसी एक कार्य में स्थिर रहना तथा उसके…
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रक्षा बन्धन

रक्षा बन्धन

रक्षा बन्धन मानव का मन बड़ा ही चंचल होता है। वह उत्पन्न परिस्थिती को स्वतः ही भाफ लेता है। परिस्थती के साथ होने वाले समायोजन के परिणाम का अनुमान भी लगा लेता है। व्यक्ति के गुण के अनुरुप उसका एक भाव भंगीमा परिलक्षित होता है। जिसका लगातार परिस्थिती के साथ समायोजन चलता रहता है। सक्रिय व्यक्ति का अनुभव उसे जगाता रहता है। निष्क्रिय व्यक्ति का अस्थिर मन कमजोर होता है, जो चतुर व्यक्ति के मकर जाल मे ऐसा उलझ जाता है, कि बिना बाहरी सहायता के वह बाहर निकल ही नही सकता है। उसकी यह बिवषता उसके गुणात्मक पहलू के…
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Loving Daddy

Loving Daddy

Loving Daddy Memory never dies which is a part of my life. A lot of moment that comes in life which focuses my mind to find him but they are in only memory. A running life has huge amount of event in which someone is highly energetic that still guide my thoughts. That person was my Daddy. When i face highly complicated matter my Daddy\'s guiding word comes in mind, i make conscious with time. My loving Daddy you will never go from my memory. My tiny life nothing knows without my parents. Childhood time of life has base information…
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गुरु पुर्णिमा

गुरु पुर्णिमा

गुरु पुर्णिमा  गुरु कि महिमा को जागृत करने के ख्याल से गुरु पुर्णिमा पर्व का स्थान र्स्वोत्तम है। गुरु की यशोगान करने से गुरुत्व का भाव जो मन मे बनता है उससे हमरी नारी का स्पंदन बढ़ने लगता है। गुरु का एक-एक वाक्य हमरे सामने से गुजरने लगता है। हमारे मार्ग के अवरोध को हटाने मे हमारे द्वारा किया गया प्रयास की मान दऩ्ड बनने लगता है। हमरा तरंगित मन हमे सचेत करता  है तथा नये उमंग के साथ कार्य को आरंम्भ करने की प्रेरणा देता है।            गुरु के सृजीत पथ पर चलकर जो हमारा कल्याण होता है उसकी…
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चौथी सावन सोमवारी

चौथी सावन सोमवारी

सावन की चौथी सोमवारी भगवान शिव को पुष्प अर्पित करते हुए मन मे जो उत्कृष्ट भाव बनता है, उस भाव को दर्शाता यह कविता हमें साधना तथा शक्ति के मार्ग को सशक्त करता है। भाव ही भगवत्व प्राप्ति का उत्तम स्त्रोत है। इसलिए भाव प्रधान यह पुजा आज पुष्प की प्रधानता को दर्शाता है। पुष्प एक बस्तु मात्र है, लेकिन इसके प्रति जो भाव मन मे बनता है, इसी से इसकी प्रधानता भक्तो के लिए अधिक है। भाव के कारण ही भगवान भक्त के करीव होते है। एक सशक्त भाव का साधक होना बहुत जरुरी है। यह भाव अनादि भी…
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