Poem

दहेज

दहेज

दहेज दहेज का बोलबाला हमेशा से रहा है। शायद ही इसको पुर्ण रुप से समाप्त किया जा सके। लेने तथा देने की प्रबृति दोनो तरफ रहती है। इसी से व्यक्ति के गुण दोष का पता भी चलता है। एक चलन भी लोगो को प्रभावित करता है। कोई धन लेकर दुल्हन से समझौता करता है तो कोई दुल्हन लेकर धन से समझौता करता है तो कोई निःस्वार्थ भाव से अपने को धन्य करता है। इस बिशाल जनमानस के बिच रंग बिरंगे रुप देखने को मिलता है। हमारा उदेश्य ऐसे समाज की स्थापना का रहता है जो एक स्वस्थ्य परम्परा का निर्माण…
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तीज

तीज

तीज पर्व तीज पर्व का पावन त्योहार रिस्तो की मजबुती के लिये किया जाने वाला त्योहार है। यूँ तो हम रोज ही आने जाने वाली समस्या के साथ दो चार होते रहते है। लेकिन एक खास अवसर पर जब लोग एक साथ एक समुह बनाकर किसी एक बिचारधारा के साथ बिचार-्बिमर्श करते है, तो उसका प्रभाव समग्र रुप से समाज पर पड़ता है। यह समाज मे बिचार स्थापना के लिये बनाया गया एक अचुक अस्त्र है। भाव प्रधान यह पर्व परिवार की निव को मजबुती प्रदान करता है। जहां परिवार मजबुत होता है, वहां का समाज भी सश्कत होता है।…
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तीसरा सोमवारी

तीसरा सोमवारी

भगवान भोलेनाथ को जल प्यारा है। शुद्ध जल को व्यवस्थित तरीके से भगवान को जलाभिषेक के बाद मन में शीतलता का भाव आता है। कहते है की जब भागीरथी के कठोर तप से गंगा स्वर्गलिक से धरती पर अवतरित हुई थी तो उसके तेज धार को रोकना संभव नहीं था। तब भगवान शिव ने अपनी जटा में गंगा को समेट कर मानव कल्याण के लिए गंगा की निरसित किया था। बहती जल धारा जीव जगत के लिए जीवन का आधार है। बहुत सारे पशु पक्षी अपना प्यास बुझाने के लिए बहता जल का ही उपयोग करते है, लेकिन उनकी जरूरत…
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गुलाब का जादू

गुलाब का जादू

गुलाब का जादू  जादू का खेल बड़ा ही निराला होता है। इसमे किया जाने वाला कार्य हमारी आकार्षण का मुख्य बिन्दु होता है। हमारा पुरा ध्याण जादु करने वाले के साथ-2 जादुई प्रक्रिया से बना रहता है। उत्साह की सिमा का अंदाज लगाना कठिन होता है। लगाव जुड़ाव का अपना ही एक गणित होता है। जिसको लोग मनोयोग से समझ कर प्रतिक्रया करते है। यदि आप भाव के प्रकट करने या भाव को समझने के धनी नही है तो प्रभाव उसके अनुरुप ही होगा। सौन्दर्य का आपना एक आभा मंडल होता है। जो समझने वाला को ही अपना शिकार बनता…
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गुरुर

गुरुर

संबंधित लेख को जरुर पढ़ेः- खुद की तलाश काव्य लेख हमें अंदर झांककर गलती सुधारते हुए जीवन मे सफलता की सिढ़ी को चढ़ने की यात्रा का बृतांत है। आप भी देख लें कही आप भी तो नही.गुरुर काव्य लेख हमें दैनिक जीवन से जुड़ी तोड़ जोड़ से होने वाले बिसंगती की ओर से सावधान रहने की कला की ओर ईसारा कर रहा है।स्वाभिमान  की कला से हमे कैसे वक्त की सिढ़ी चढ़नी है इसको व्यक्त करता यह काव्य लेख एक दृष्टि देता है।वक्त का आईना खुद को नियोजित करने के लिए वक्त के आईने मे खुद को देखना जरुरी होता…
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खुद की तलाश

खुद की तलाश

खुद की तलाश खुद की तलाश एक कठीन कार्य है, क्योकी लोग व्यवस्था की धारा मे जीये चले जाते है। उन्हें कभी खुद के लिए समय निकलता ही नहीं है, जिससे की वह देख सके की वाकई उसकी यात्रा का पड़ाव कहाँ होने वाला है। उसे लगता है, कि वक्त की इस अनमोल पल को रोककर व्यर्थ क्यो चिंतन करे। लेकिन व्यवस्था की अपनी सिमा होती है वह उसी के अनुरुप अपना कार्य करती है। य़दि आपके सामर्थ मे उसे समझने की क्षमता की विकाश है, तो आप वक्त की कठीनाईयो से आसानी से पार लग जायेंगे अन्यथा आपको बदले…
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कृष्णाष्टमी

कृष्णाष्टमी

कृष्णाष्टमी कृष्ण के जन्म को भारतीय समाज के द्वारा युग प्रवर्तक के रुप मे देखा जाता है। जब दुष्टो का शासन पुर्णता पर हो और सारे जतन निष्क्रिय साबित हो जाये, तब एक ऐसे व्यक्ति का जन्म स्वर्णिम हो जाता है, जो इस दुष्टो का नाश करे। एक दोस्त का बिश्वास और दुसरे का बिश्वासघात, उसपर निराशा और हताशा के साथ बना संयोग कृष्ण के जीवन को दर्पण की भांती प्रकाशित कर दिया। जीवन मुल्य को निर्धारित करने, स्वयं की पराकाष्टा को बनाने तथा समय के अनुरुप सही निर्णय उनके जीवन मे मिलता है। कृष्ण की गाथा धार्मिक के साथ-साथ…
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