बन्धन

बन्धन

बन्धन

बन्धन यह शब्द लोगो को बहुत व्यथित करता है, क्योकी यह स्वतंत्रता की धारा मे आवरोध उतपन्न करता है। लेकिन यह यदि योगपुर्ण हो तथा समय के साथ परिवर्तनशिल हो तो लाभकारी हो जाता है। मन की स्वतंत्रता यदि तन को आधार मान ले तो ब्यक्ति का पतन तय मान लेना चाहिए। मन पर बन्धन का मानसिक दवाव एक शक्तिशाली हथियार है। अपने आपको समय के धुरी से बाँधकर रखना एक कलात्मक योग है। इसका सतत पालन करना व्यक्ति को कार्य दबाव से मुक्ति के मार्ग को आसान बना देता है। समय का कार्य के साथ समायोजन जरूरी है जिससे…
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आनन्द चतुर्दशी

आनन्द चतुर्दशी

आनन्द चतुर्दशी यह धागों का त्योहार है। इसमे भगवान बिष्णु की पुजा की जाती है। भगवान बिष्णु को प्रतिपालक कहा जाता है। वे जीवआत्मा के पुरे कर्म को नियंत्रित करते है। एक प्रभावी कर्म को करने के लिए एक प्रेरणा का होना होता है जिससे जीवन को सबलता मिलता है। जीव के जीवन का यह सबसे हमत्वपुर्ण काल जन्म से मृत्यु तक का समय होता है। इसा समय मे अपने कर्मो के द्वारा अपने आत्मा को एक शक्तिशाली, प्रभावी और उर्जवान योग प्राप्त करना होता है। इसी से भगवान विष्णु की पुजा की जाती है तथा संकल्प के रुप मे…
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रक्षा बन्धन

रक्षा बन्धन

रक्षा बन्धन मानव का मन बड़ा ही चंचल होता है। वह उत्पन्न परिस्थिती को स्वतः ही भाफ लेता है। परिस्थती के साथ होने वाले समायोजन के परिणाम का अनुमान भी लगा लेता है। व्यक्ति के गुण के अनुरुप उसका एक भाव भंगीमा परिलक्षित होता है, जिसका लगातार परिस्थिती के साथ समायोजन चलता रहता है। सक्रिय व्यक्ति का अनुभव उसे जगाता रहता है। निष्क्रिय व्यक्ति का अस्थिर मन कमजोर होता है, जो चतुर व्यक्ति के मकर जाल मे ऐसा उलझ जाता है, कि बिना बाहरी सहायता के वह बाहर निकल ही नही सकता है। इसी उलझन से बाहर निकलने के लिए…
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