प्यारी भाभी

Pyari Bhabhi

Bhabhi poem

प्यारी भाभी

प्यारी भाभी कविता आधुनिक समाज की सोच को दर्शाती एक देवर भाभी के बिच की कहानो कहती है। हमारे सोच के बिच एक बिचार की प्रतिस्थापन को बनाती भाभी परिवारीक रिस्तो को बनाने की भरपुर कोशिश करती है। हमारे बिच आजकल खुलापन का जो दौर चाला है उसका असर रिस्तो पर पड़ने लगा है। लेकिन सभ्य समाज मे ताना बाना को बुनते हुए एक मर्यादा को बनाती भाभी एक महत्वपुर्ण बिचार रखती है। बिचार को एक दुसरे की सिमा को निर्धारित करती हुई लगती है।

परिवार को बनाने बिगारने मे हमरे बिचार का महत्वपुर्ण रोल होता है। हमारे बिचार हमारे आसपरोस से आते है हम जिस परिवेश मे रहते है। आतः हमारा परिवेश स्वस्थ्य हो इसकी कामना हम करते है। और आशा करते है कि हम अपने परिवेश को संयमित और नियंत्रित रखने के लिए अपने स्तर से सतत प्यास जारी रखेंगे।

अत्यंत गंभीर प्रश्न को कहता देवर भाभी को प्रभावित करने की कोशीश करता है। लेकिन मर्यादा मे रहती हुई भाभी अपने बिचार को व्यवस्था के साथ रखती हुई एक नयी शुरुआत करती है। तरंगित मन को नियंत्रित करने के लिए सिर्फ बातें काफी नही होती है। वल्कि समय के साथ इसका समाधान भी निकलना चाहीए। भाभी ने इस कविता मे एक उपयुक्त उपाय को बताकर उसका निर्वहन करके एक प्रयास किया है। हमारा प्रयास जारी रहना चाहीये। गलत को रोककर नयी की शुरुआत ही सत्य पर असत्य की बिजय की कहानी कहता है। तथा एक नये परिवार की रचना करता है जिससे नये समाज की आधारशिला बनती है। जय हिन्द।

आप अपने बिचार यहां रख सकते है। इसे शोयर जरुर करें यदि आपको यह अच्था लगे। हमारा लेख नियमित पढ़े तथा अपने बिचार रखे।

1 thought on “Pyari Bhabhi

  1. बहुत ही अच्छा कविता है भैजी हम क्या कहें आपको हमारे पास कोई शब्द ही नहीं है!

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