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Aug
Oplus_131072 महिला समानता दिवस (Women’s Equality Day) आज की दूनीया बाजारबाद को प्रश्रय देती है। यहां ऐसा माना जाता है कि सबकुछ बिकाऊ है। बस आपको बेचने आना चाहिए। इस सोच के कारण समय और परिस्थिती के अनुसार हर बस्तू की किमत लगायी जाती है और खरीदी तथा बेची जाती है। इस खरीद बिक्री कि क्रिया से स्वयं को उच्च समझने की भूल भूलैया मे व्यस्त बतलाया जाता है। इसके उपरांत मिलता है तनाव, भूख और अशांति। इसके बाबजूद यदि फिछे मुडकर देखे तो लगता है हम भौतिक स्तर पर दुसरे से ऊपर तो है हमे और आगे जाना है।…