इंतजार की उदासी

Intijaar की udasi

इंतजार हमे बहुत कुछ सीखा देती है क्योकी किसी कार्य को होने के लिए उसका अपना एक समय होता है और हमें उससे जुड़ने के लिए इंतजार करना परता है। लेकिन कभी-कभी ये इंतजार काफी लम्बी हो जाती है जो हमारे सोच के दायरे मे नही आता है। इसका कारण हमें सीमित दायरे मे रहकर सोचना से जुड़ा होता है। हमारी अपेक्षा इतनी बढ़ जाती है कि हम ज्यादा गहरा सोचना ही नही चाहते है क्योकी इससे होने वाले परेशानी को हम स्वीकार नही कर सकते है। संभावना के साथ होने वाले परिवर्तन के लिए यदि हम तैयार रहते है तो इंतजार से हमारी उदासी नही आयेगी लेकिन यदी हम इसके लिए तैयार नही है तो एक खास इंतजार हमारे यादों मे बनकर हमे एक टिस देती रहती है।

    जीवन के करवे अनुभव इन्ही खास क्षण को जीने के लिए प्रेरित करती है। जीवन मुल्यों के निर्धारण के समय हमें खास तौर पर सतर्क रहने की जरुरत है। हमें अपने मानडंडो पर चलकर आगे बढ़ना चाहिए न कि दुसरे के प्रति आरुढ़ होकर आगे निकलने चाहिए। यह प्रसंग इसी तरह के समय के प्रति सावधान करता है। सीमित जानकारी के साथ यदी हम आगे बढ़ते है तो हमे इसके विकल्प के ऊपर भी विचार करने की जरुरत होती है। सकारात्मक सोच होनी चाहिए और यह जरुरी भी है लेकिन एक सशक्त व्यक्ति बनने के लिए यह जरुरी है कि ओ अपने नजरियो को व्यापक रखे। नही तो संकिर्णता की सोच हमें इंतजार की उदासी से हमारा परिचय करायेगी।

इंतजार के समाप्ति के बाद जो अनुभव का नजरिया बनता है उससे जीवन के प्रती उदारता बढ़ जाती है और पहले से ज्यादा ताकत के साथ जीवन मे आगे निकलते है। उच्च महत्वाकांक्षा भी हमे कभी-कभी हमारे सोचने के मार्ग मे बाधक बन जाती है और हम एक इतजार के राह पर निकल परते है। पर यहां भी वही होता है हम विक्ल्प पर विचार नही करते है क्योकि इससे होने वाले नुकसान के प्रति हमारी तैयारी नही रहती है। अगर तैयारी है भी तो हम इस जोखिम के प्रती सावधान नही रहते है। तो इस उलझे पल से बाहर निकलते हुए एक कड़े अनुभव की यादों के सहारे हम जीवन मे उच्च आदर्श को स्थापित करे और लोगो  को इसके प्रति सतर्क करते रहे जिससे की एक सुखी और उन्नत समाज का निर्माण हो। जय हो।

लेखक एवं प्रेषकः अमर नाथ साहु

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By sneha

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