विश्वकर्मा पुजा

Vishwakarma Puja

Bhabhi poem

विश्वकर्मा पुजा लौह जगत के सारे लोगो के द्वारा बिशेष रुप से ही जाती है। मशीन से होने वाले कार्य को लम्बे समय तक कार्य करने की कामना के साथ यह पर्व मनाया जाता है। लौह तत्व के इस्तेमाल के साथ होने वाला दुर्धटना कभी-2 बड़ा जानलेवा सावित होता है। भगवान की पुजा से इसके सही तरह से कार्य संपादन की कामना की जाती है।

कहा जाता है कि, भौतिक संसार की सुन्दर रचना बनाने में शिल्पकार के रुप मे विश्वकर्मा आते है। देव जगत की दुनीया में शिल्पकारी का तथा निर्माण कर्य का पुरा भार इनको ही रहता है। विश्वकर्मा जी को प्रत्येक वर्ष याद किया जाता है।

लौह वाले वाहन में तो इनकी पुजा रोज होती है। फिर भी बर्षिकोत्सव पुजा का अपना स्थान है। इस दिन विधिवत पुजा करके विश्वकर्मा भगवान से व्यपार में मंगल कामना की आराधना की जाती है। वर्तमान समय मे शोध के नये-नये आयाम जुड़ रहे है। हम लगातार विकाश के तरफ कदम बढ़ाते जा रहे है। लेकिन गलती की संभावना रहती है। कहा जाता है, व्यापार जोखिम का चीज है

भगवान विश्वकर्मा की पुजा से सारे दोष कट जाते है। भावना की सर्वोच्यता का संवहन होना तथा उसका संदेश एक दुसरे तक पहुँचकर जो बैचारिक एकात्म बनता है। उससे एकता के साथ-साथ नये-नये संभावनायें भी बनती है।

भगवान विश्वकर्मा की कृपा वनी रहे तथा निर्माण के व्यापार की दुनीया सदा आगे बढ़ती रहे इसी कामना के साथ भगवान को प्रणाम।

नोटः- अगर आपको यह लेख और कविता अच्छा लगे तो इस पाठ के लिंक को अपनो तक जरुर प्रेषित करे। इसके लिए हम भगवान विश्वकर्मा से आपके भले की कामना करते है।

लेखक एवं प्रेषकः- अमर नाथ साहु

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