गुरुर

गुरुर

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खुद की तलाश काव्य लेख हमें अंदर झांककर गलती सुधारते हुए जीवन मे सफलता की सिढ़ी को चढ़ने की यात्रा का बृतांत है। आप भी देख लें कही आप भी तो नही.
गुरुर काव्य लेख हमें दैनिक जीवन से जुड़ी तोड़ जोड़ से होने वाले बिसंगती की ओर से सावधान रहने की कला की ओर ईसारा कर रहा है।
स्वाभिमान  की कला से हमे कैसे वक्त की सिढ़ी चढ़नी है इसको व्यक्त करता यह काव्य लेख एक दृष्टि देता है।
वक्त का आईना खुद को नियोजित करने के लिए वक्त के आईने मे खुद को देखना जरुरी होता है, यह लेख इस भाव के जागृत कर हमे एक नयी उर्जा देता है, जिससे की हम समय के साथ चल सके।’,
करोना की वर्षी करोना के यादो को संकलन करने का एक प्रयास है जो हमे एक संदेश दोता है मानवता के प्रति हमारे सतर्कता का, हमारे एकजुटता का।’, ”
श्रधेय बिदाई बिदाई यदि यादगार बन जाये तो इसकी गाथा को याद करके जे सुख मिलता है वह स्वागत योग्य होता है।
गुलाब का जादू फुल तो एक माध्यम है जिसके द्वारा भाव का महत्ता को समझा जाता है।

By sneha

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