पहला सोमबारी

पहला सोमबारी

यह बिशेष पर्व सावन की शुरुआत के साथ सुरु होता है। सावन के समय होने वाले मौसम मे बदलाव को व्यवस्थित करने के लिए यह पर्व बड़ा ही उत्तम है। दिनभर के उपवास के वाद शायं काल फलाहार लेने की छुट है इसके पश्चात रातभर निर्जला का पर्व रहता है। सुवह की सुर्य की किरणों के साथ भोजन की व्यवस्था का प्रावधान है। पहला सोमवारी मे बिशेष तैयारी की जरुरत होती है। मन को संतुलित व्यवस्थित करने के बिचार का अगमन पहले से रहता है। दैनिक जिवन की भागमभाग को संतुलित करने की जरुरत होती है। ऐसा होता भी है क्योकि पर्व की व्यवस्था के साथ रहने से गुणता का आगमन स्वतः हो जाता है। आसपरोस का माहौल भी हमें प्रेरित करता है। बन्धु-बांधव का सहयोग भी मिलता है। एक स्वतः स्फुर्त मन काम करने लगता है। देव स्थल की सजावट भी मन मे प्रेरणा को जगाता है।

इस सबसे अलग भी भगवान भोले नाथ की आराधना का भाव तथा प्रभाव दोनो की प्रधानता रहती है। मन एक उच्चश्रिख बिचार से ओतपोत रहता है। भक्ति रस का समावेश मन को भक्ति मय कर देता है। कई लोग पहला तथा अंतिम सोमबारी करके अपने आराध्य को खुश कर लेते है। जबकि अधिकांश लोग सभी सोमबारी करते है। मन को एकाग्रचित करने का एक उत्तम मार्ग है। हमें यह अवसर हर साल मिलता है। हमारे मन मे एक बिचार शक्ति चलती रहती है। भक्त भगवान के मनोभाव को मिलने का एक उत्तम समय है। प्रकृति तथा समाज दोनो का साथ हमे इस समय मिलता है।

भक्त जन आज के समय का बिस्तार से बर्णन करने का नही है बल्कि यथाशक्ति भक्ति को बनाने तथा भगवत्व प्राप्ती का है। आपका दिन शुभ हो आप हमेशा नबोधविध बिचारो से ओतपोत रहे। अपका मनोरथ पुर्ण हो। आप हमेशा जागृत रहे। कल्यानकारी भाव आपके मन मे प्रस्फुटित होता रहे। इसी भावना के साथ हम आपके अच्छे भविश्य की कामना करते हुए आज की गति को बिराम देते है। जय शिव

लेखक एवं प्रेषकः- अमर नाथ साहु

संबंधित लेख को जरुर पढ़ेः-

1. आरती लक्ष्मी जी नया आरती 2021 है जो हमारे माता के प्रति आगाध श्रद्धा को व्यक्त करता है, दिव्य रुप को दर्शाता यह नया आरती का गान करें।

2. दुर्गा माता की आरती नया आरती 2021 माता के दिव्य रुप के हृदय के पास लाकर माता की आराधना को व्यक्त करता आरती का गान जरुर करें।

3. करवा चौथ का पर्व हम पुरी श्रद्दा एवं विश्वास के साथ मनाते है इस काव्य लेख को जुरुर देखे जिससे की आपका पर्व के प्रती निष्ठा मे प्रगाढ़ता आये।

4. कृष्णाष्टमी पर्व मे भगवान कृष्ण की दिव्य दर्शन की सिख को समाहित यह काव्य लेख आज के संदर्भ मे जोड़कर कहा गया है।

4. तीज का पर्व भारत मे परमपरा के साथ मनाया जाने वाला पर्व है इसके बिभिन्न रुप का काव्य वर्णन देखें।

5. विश्वकर्मा पुजा हमारी भक्ति भाव सतत रुप है जिससे हम नयेपन की कामना करते है, इस भाव के दर्शाता काव्य लेख देंखें।

6. पहला सोमवारी ब्रत, दुसरा सोमवारी ब्रत, तीसरा सोमवारी ब्रत, चौथा सोमवारी ब्रत के भक्ति रुप का वर्णन तथा हमारी कामना को दर्शाता यह काव्य रचना एक अनुपम कृती है।

7. आनन्द चतुर्थी का पर्व धागा बन्धन का पर्व है जो हमे हमारी भाव को एक नये आयाम मे श्रजन करता है ।

8. सरस्वती माता से वरदान को मांग कर जीवन को परीपुर्ण करने का ये काव्य पाठ हमारे दिल को छु जाता है।

By sneha

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!