Month: February 2022

सत्य कहां मिलेगा

सत्य कहां मिलेगा

सत्य कहां मिलेगा लेख सत्य के खोज मे निकला व्यक्ति वस्तुतः स्वयं को ही खोज रहा होता है। स्वयं को व्यवस्थित करने के लिए वह अपना राह तलास रहा होता है। भटकाव का कारण गुण की प्रखरता का नही होना होता है। गुण के प्रखरता मे कमी होने के कारण उसका समायोजन सही से नही होगा। जिससे की उसके सम्मान मे कमी होगी। इसी कमी को पुरा करने के लिये उसको तोड़ जोड़ करना परेगा। इससे उत्पन्न व्यवस्था मे वह उलझता चला जायेगा। उपलब्ध परिस्थिती का लाभ लेता वह इस कदर उलझ जायेगा कि एक दिन वह स्वयं को खोजने…
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अतिथि आये

अतिथि आये

अतिथि आये अतिथि का भी अपना एक गणित होता है जिससे उनका संयोग और बियोग बनता है। एक बार ऋषि दुर्वाशा अर्जुन के वन आश्रम मे पधारे। उनके एक भाई से भोजन का प्रबन्धन करने को कहकर अतिथि अपने साथी समेत वन मे ही स्नान को चले गये। इस बात की सुचना जब द्रोप्ती को हुई तो उनकी चिंतन बढ़ने लगी क्योकि घर मे सभी खाना खा चुके थे। फिर भी वह अपने भोजन के वर्तन को देखने गई। उसमे सिर्फ एक ही चावल था। इसी बिच भगवान कृष्ण अतिथि बनकर अपने भक्त के घर पहुँच गये। भक्त के भाव को…
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प्यार कौन करता है

प्यार कौन करता है

समय एवं परिस्थिति के साथ शारीरिक बिन्यास के अनुरुप व्यक्ति का जब समायोजन होता है तो उसका मानसिक अवेग भी एक महत्वपुर्ण भूमिका अदा करता है। इसके बाद व्यक्ति स्वयं को स्थापित करता है। यूँ तो समायोजन का कार्य निरंतर चलता रहता है। लेकिन एक मुकाम पर पहुँच जाने के बाद व्यक्ति का बहुत कुछ नियोजित होकर स्थायित्व कि ओर बढ़ने लगता है। एक अवस्था से दुसरे अवस्था (यानि किशोरावस्था से युवावस्था यथा) मे प्रवेश करने पर ज्यादा मुश्किल का सामना करना पड़ता है। प्रकृति के नियम के अनुरुप स्वतंत्र रहने वाले हर वस्तु को अपने संयुक्त होने की शर्तों…
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सुबोध जी का 26वॉ जन्मदिन

सुबोध जी का 26वॉ जन्मदिन

जन्मदिन के बधाई को बिचारोंं मे संग्रहित करना कठिन है। फिर भी एक रेखा तो खिंचनी होती है जिससे कि पथिक के आने वाले समय के बारे मे विश्वास तथा आशा बन्ध सके। वैसे तो विवेकी मानव स्वयं ही गुणित बिचारधारा मे उलझा रहता है। नित होने वाले परिवर्तन से उसको सामना करना पड़ता है। इसके बाद भी उसका निर्धारित लक्ष्य के तरफ बढ़ना यदि सतत जारी है तो उसे कर्मयोगी कह सकते है। कार्मयोगी का अपना विश्वास ही उसका सबसे बड़ा हथियार होता है, जिससे की वह अपने कर्म पथ को रौशन करता जाता है। आपका मार्ग शरीर से…
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गायत्री बन्दना

गायत्री बन्दना

गायत्री वंदना माता गायत्री की वन्दना से हम उनके दिव्य शक्ति को अपने अंदर जागृत करते है। दिव्य शक्ति को मंत्र उर्जा के रुप मे वेदो मे स्थान दिया गया है। चुकी मानव, भाव का एक युक्ति यंत्र है। इसकी सारी उर्जा इसके नाभी मे कुंडलीत रहती है, जो सुषुप्तावस्था मे विधमान रहती है। इस कुंडलीत उर्जा को जिस भाव के रुप मे हम क्रियांवयित करेगे, वैसा ही हमारे चित का स्वरुप हो जायेगा। इसलीए मंत्र शक्ति, माता गायात्री के एक एकात्म स्वरुप का भान करते हुए, उनके वेदमंत्रोयुक्त भाव के द्वारा, हम स्वयं को उर्जावान करते है। हमारी जागृत…
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सिन्दूर

सिन्दूर

भारतीय समाज मे सिन्दुर का बड़ा ही महत्व है। हिन्दू महिलायें इन्हें अपने माथ के पर धारण करती है। ऐसा माना जाता है कि यह सु्हागन का प्रतिक है। सुहागन महिलायें को सिन्दूर धारण करने के बाद उसके मनोभाव के उच्यता को सहज ही समझा जा सकता है। यह सुरक्षा तथा विश्वास के मानसिक स्तर को बढ़ा देता है। भारतीय समाज मे सिन्दूर की एक गहरी भावनात्मक समझ की स्थापना हो चुकी है। एक विवाहिता को समाज मे सिन्दूर के स्थापित भाव को बनाये रखने के लिए एक दवाव होता है। विवाहित महिला के प्रति लोगो के सम्मान के भाव…
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बधाई हो बधाई

बधाई हो बधाई

बधाई देने का अपना ही महत्व होता है। इसके आनन्द की तुलना कर पना संभव नही है क्योकी यह व्यक्ति पर निर्भर करता है। बधाई स्विकार किया जाना भी देने वाले के प्रति लगाव को व्यक्त करता है। आजकल का दौर सुनकर या देखकर शांत रहने का है। जिसका परिणाम यह होता है की लोगो के बिच बैचारीक दुरी बढ़ती जा रही है। बैचारिक दुरी को कम करने के लिए यह संदेश एक उद्वीपन का कार्य करेगा। जिस भाव को हम स्वतः स्फुर्त तरीके से समझ सकते है उसका एक अलग रुप आपको रोमांचित करेगा। इसलिए इसके भाव को समझ…
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लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि

लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि

लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि गुण कौशल की प्रखरता जब अपने मुकाम तक पहुँचती है, तो वह गुण धारक को रौशन कर देती हैैैै। उनका यात्रा बृतांत एक यादगार पल बन जाता है। असफल लोग या संधर्षरत लोगो को इस तरह के बिचार की बहुत जरुरत होती है, जिससे की उनकी कार्य उर्जा का प्रवाह बना रहे। मन कि दुर्वलता को दुर करने का यह एक शसक्त जरीया होता है। भारत के बौधिक सम्पदा मे इस तरह के अनेको उदाहरण मिलते है। समय की बली बेदी पर बनते बिगरते जीवन की दिव्य लिला को करिव से अऩुभव करने का एक संयोग…
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मॉ वरदान दो

मॉ वरदान दो

ज्ञान की तरलता से हम सब परिचित है। ज्ञान का स्वध्याय तुलनात्मक है। इसके कारण इसके धारण मे बिविधता देखने को मिलती है। बास्तविक ज्ञान की आज भी खोज जारी है। मानव का चंचल मन जहां तक तरंगित हो पाता है हमारी जानकारी वही जाकर सिमित हो जाती है। मानव के मन के स्थिर करने तथा सुखमय जीवन निर्वाह के आगे हम सोच भी नही रहे।     ये अनन्त आकाश आज भी हमारे सोच से परे है। जब ये भाव मन मे आता है तो मन गुणित होने लगता है। इस गुणित मन को व्यवस्थित करने का योग जिसे मिलता…
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