गांधी जयंती

Gandhi Jayanti

बिश्व शांति मे गांधी के बिचारों का सम्मान हमारे राष्ट्र के इस बिचारधारा के साथ बिकाश की यात्रा का परिचायक है। भारतीये जनमानस मे गांंधी का स्थान उनके त्याग के लिये सदा जाना जाता रहेगा। हमारे बिकाश के साथ ही उनके बिचार को एक और गती मिलेगी जिससे मानव सामाज एक शांती संदेश के रुप मे उन्हे सदा याद करता रहेगा।

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आनन्द चतुर्दशी

Anand Chaturdasi

आनन्द के धागा बन्धाने का पर्व आनन्द भगवान को समर्पित है, जिसमे मु्ख्य पुजा भगवान बिष्णु की होती है। भगवान इस धागा को बांधने वाले के घर आनन्दित रहने का आर्शिवाद देतै है। महिला बाये तथा पुरुष इसे दाहिने हाथ मे बांधते है।

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विश्वकर्मा पुजा

Vishwakarma Puja

प्रकृति के रचनाकार एवं शिल्पकार विश्वकर्मा आज हमें शक्ति दो कि हम वर्तमान के चुनौती का सामना कर सके। मानव के विकाश की पराकाष्ठा दुसरे ग्रहो पर भी जाये ऐसी हमे उन्नती दो। मेरे अंदर एक उत्साह का भाव भर दो।

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Chaurchan poem

Chaurchan

पुत्र को दिर्धायु बनाने के लिए चौरचन पर्व को करती माता, समाज के शुद्ध स्वरुप को अपने पुत्र मे स्थापना की मांग करती है। निष्कलंक बिकाश की कामना भगवान गणेश से करती हुई ब्रत को पुरा करती है।

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तीज

Teej

पति के लिेए आयु मांगती पत्नी तीज करती है, और नाजुक रिस्ते मे नया रंग भरती है। माता पार्वती को समर्पित यह पर्व पुर्णतः निर्जला होता है।

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US troops leave Afghanistan

US troops leave Afghanistan

तिसरा बिश्व युद्द की शुरुआत के मध्यकाल का समय चल रहा है। इसके एक दुसरे को निचे दिखाने की होर है। अमेरिका का अफगानिस्तान छोड़ना इसी से प्रभावित है। नये बिचार की एक धारा को स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है। इसको अमेरिका ने समय पर छोड़ दिया है।

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कृष्ण जन्माष्टमी कविता

Krishna Janmashtami

कृष्ण जन्माष्टमी मानव समाज को आपसी रिस्तो की समझ के साथ राष्ट्र की चेतना को बनाये ऱखने के लिए जरुरी तथ्य को की ओर इसारा करता है। हमारा कर्तव्य है कि हम सतर्क तथा सहज रहे लेकिन प्रयासरत रहे।

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अखण्ड जाप कविता

Akhand Jap

अखण्ड जाप कविता चंचल मन को स्थिर करने के एक उपाय है जिसमे एक प्रयोजन को स्थापिता किया जाता है जिससे की मन को चेतना की प्राप्ती होती है। आजकल के भाग दौर के जिवन मे इस तरह के युक्ति शान्ति का एक उपाय देती है।

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रक्षा बन्धन कविता

Raksha Bandhan

रक्षा बन्धन पर कविता रक्षा बन्धन कविता रक्षा सुत्र के बन्धन को प्रस्तुत करता है। हमे समाज को एक सुत्र मे बांधने के लिए कई तरह के बिधान से गुजरना परता है उसी मे से एक है रक्षा बन्धन का त्योहार।

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चौथी सावन सोमवारी कविता

Fourth Sawan Sombari

सावन की चौथी सोमवारी कविता भगवान शिव भक्ति की प्रगाढ़ता का भाव पुष्प अर्पित करते हुए जो भक्त के मन मे उठता है। उसी भाव को दर्शाता यह कविता शिव से बिशेष शक्ति की अनुऱोध कर रहा है। भक्त की भक्ति का यह अनुपम संयोग का बर्णन आपको अवश्य अनग्रहित करेगा।

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