Bhakti

जीवन के पार चलो

जीवन के पार चलो

जीवन के पार चलो जीवन के पार देखने वाला दृष्टि पाकर व्यक्ति अहलादित हो सकता है। आन्दित हुए व्यक्ति सतमार्ग पर चलना शुरु भी कर सकता है, लेकिन उसके लक्ष्य तक पहुँचने मे आने वाली वाधा को पार जाने की शक्ति समर्थ का होना भी जरुरी है। इसका पुर्व पुर्ण ज्ञान होना संभव नही है। इसके लिए तो व्यक्ति का संकल्प शक्ति ही याचक बन सकता है। यही वो शक्ति है, जो व्यक्ति को पार जाने के लिए यथेष्ट बल को नियोजित कर बाधा से पार ले जायेगा। हमारे शरीर के अंदर बिभिन्न धटको मे बल समाहित है, जिसका यथोसमय…
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मुर्ती पुजा

मुर्ती पुजा                                                      मुर्ती पुजा का इतिहास बहुत पुराना है। मानव ने जबसे जीवन को समझना शुरु किया तभी से उन्होने चित्र रुप का निरुपण किया। उसके भय को एक सहारे की जरुरत थी। यही सहारा मुर्ति के पुजा का स्थान सुनिश्चित किया। मानव के बिकाश की यात्रा का इतिहास आज के मानव को बुद्दिमान सावित करता है। लेकिन मुल बिषय डर आज भी है। डर का नियोजन समय के साथ तथा व्यक्ति दर व्यक्ति अलग - अलग होता है, तथा किया जाने वाला उपाय भी अलग होता है। लेकिन धार्मिक मान्यता हमारे अंदर जो भाव पैदा करता है, उससे…
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भक्त हनुमान

भक्त हनुमान

भक्त हनुमान भक्ति की परमानन्द को पाने वाले भक्त हनुमान को भक्त शिरोमणी भी की संज्ञा दी जाती है। भगवान की भक्ति की महीमा को गाने मे समस्त जीवो मे हनुमान का नाम सबसे ऊपर आता है। हनुमान जी ने अपने लिए भक्ति के सिवाय कुछ नही चाहा। यही गुणकारी भाव उनको समस्त जीवो से ऊपर ले गया। दिन दुखियो को मदद करना भारतीय बिचारधारा की धरोहर रही है। इसी धरोहर के भाव को जिवंत रुप हनुमान जी ने दिये जिसके कारण हम उन्हे भगवान की संज्ञा भी देते है। भक्त के रुप मे उनकी गाथा हम गाते है तो…
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महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि लेख भगवान भोलेनाथ के बैराग्य को माता पार्वती ने अपने तपोवल की शक्ति से तोड़कर उनको अँगीकार कर लिया। भगवान ने जीव जगत वासी के लिए शायद यह लीला रची हो। लेकिन जनमानस के लिए आज भी उनका यह कार्य याद किया जा रहा है। कहते है कि पुजा तो गुण की ही होती है। माता पार्वती के आलौकिक दृष्टि मे शिव शक्ति के जो गुण दिखे हो। हम जगत वासी के विए तो उनके हर गुण महान ही दिखते है। काल तथा परिस्थिती के अनुरुप महादेव के शक्ति धारण तथा समस्या निवारण कि चर्चा समस्त ब्रम्हाण्ड मे चलती…
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अतिथि आये

अतिथि आये

अतिथि आये अतिथि का भी अपना एक गणित होता है जिससे उनका संयोग और बियोग बनता है। एक बार ऋषि दुर्वाशा अर्जुन के वन आश्रम मे पधारे। उनके एक भाई से भोजन का प्रबन्धन करने को कहकर अतिथि अपने साथी समेत वन मे ही स्नान को चले गये। इस बात की सुचना जब द्रोप्ती को हुई तो उनकी चिंतन बढ़ने लगी क्योकि घर मे सभी खाना खा चुके थे। फिर भी वह अपने भोजन के वर्तन को देखने गई। उसमे सिर्फ एक ही चावल था। इसी बिच भगवान कृष्ण अतिथि बनकर अपने भक्त के घर पहुँच गये। भक्त के भाव को…
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गायत्री बन्दना

गायत्री बन्दना

गायत्री वंदना माता गायत्री की वन्दना से हम उनके दिव्य शक्ति को अपने अंदर जागृत करते है। दिव्य शक्ति को मंत्र उर्जा के रुप मे वेदो मे स्थान दिया गया है। चुकी मानव, भाव का एक युक्ति यंत्र है। इसकी सारी उर्जा इसके नाभी मे कुंडलीत रहती है, जो सुषुप्तावस्था मे विधमान रहती है। इस कुंडलीत उर्जा को जिस भाव के रुप मे हम क्रियांवयित करेगे, वैसा ही हमारे चित का स्वरुप हो जायेगा। इसलीए मंत्र शक्ति, माता गायात्री के एक एकात्म स्वरुप का भान करते हुए, उनके वेदमंत्रोयुक्त भाव के द्वारा, हम स्वयं को उर्जावान करते है। हमारी जागृत…
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मॉ वरदान दो

मॉ वरदान दो

ज्ञान की तरलता से हम सब परिचित है। ज्ञान का स्वध्याय तुलनात्मक है। इसके कारण इसके धारण मे बिविधता देखने को मिलती है। बास्तविक ज्ञान की आज भी खोज जारी है। मानव का चंचल मन जहां तक तरंगित हो पाता है हमारी जानकारी वही जाकर सिमित हो जाती है। मानव के मन के स्थिर करने तथा सुखमय जीवन निर्वाह के आगे हम सोच भी नही रहे।     ये अनन्त आकाश आज भी हमारे सोच से परे है। जब ये भाव मन मे आता है तो मन गुणित होने लगता है। इस गुणित मन को व्यवस्थित करने का योग जिसे मिलता…
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माँ दुर्गा और युद्ध भूमी

माँ दुर्गा और युद्ध भूमी

मां दुर्गा के युद्ध भुमी सामाजिक न्यायिक जिवन निर्वाह के लिए सामाजिक जिवन का ताना-बाना को समझना तथा उसके अनुरुप अपने को ढ़ालकर कार्य करने की कला बिकसित करनी होती है। सामाज मे एक साथ कई घटना घटित होती है। सभी घटना को समझना तथा उसके अनुरुप चलना कठिन कार्य है। हमें कोई एक दिशा अपना तय करना होता है। जिसके सहारे हम आगे बढ़ते है। यही दिशा हमरे जिवन को एक अर्थ देता है। यह दिशा कौन हो इसका सही प्रारुप क्या हो इसी बात को समझने के लिए हम समाज मे घटित होने वाले घटना को समझना को…
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पहला सोमबारी

पहला सोमबारी

यह बिशेष पर्व सावन की शुरुआत के साथ सुरु होता है। सावन के समय होने वाले मौसम मे बदलाव को व्यवस्थित करने के लिए यह पर्व बड़ा ही उत्तम है। दिनभर के उपवास के वाद शायं काल फलाहार लेने की छुट है इसके पश्चात रातभर निर्जला का पर्व रहता है। सुवह की सुर्य की किरणों के साथ भोजन की व्यवस्था का प्रावधान है। पहला सोमवारी मे बिशेष तैयारी की जरुरत होती है। मन को संतुलित व्यवस्थित करने के बिचार का अगमन पहले से रहता है। दैनिक जिवन की भागमभाग को संतुलित करने की जरुरत होती है। ऐसा होता भी है…
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