Poem

हिन्दी नव वर्ष

हिन्दी नव वर्ष

हिन्दी नव वर्ष भारत एक कृर्षी प्रधान देश है। यहां के वन उपवन से ही सुख और समृद्धी आता है। जिवन को उद्वेलित करने तथा नयापन का एहसास करने के लिए हमारी प्रकृति ही हमारा आधार है। कहा जाता है कि अन्न से आनन्द आता है। फसल के कटकर घर आने के बाद मन मे प्रसन्नता तो आता ही है वाग बगीचे भी प्रकृति के बदलते मौसम को स्वागत करते है। फलदायी बृक्ष मज्जर से लद जाता है। मधु की मादकता चलती है तो किटपतंग परागन के लिए मडड़ाने लगते है। प्राकृत अपने नियम को इसतरह सुचिबद्द किया है कि…
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सुशासन बाबू

सुशासन बाबू

राजनिति सामाजिक परिवर्तन का आईना होता है जिसमे हमे समाज की परिवर्तन की दिशा का ज्ञान होता है। गतिशिलता जीवन की धारा है जिससे हमारी आत्मा को शक्ति मिलती है वही पर स्थिरता हमारा स्वभाव है जिसमे शरीर को आनन्द मिलता है। इस दोनो भाव को समस्त रुप को एक साथ क्रियांवित होते हुए यहां हम देख सकते है। सुशासन की बात तब होती है जब समाज मे स्थिरता की स्थिति बिगड़ जाती है। इसके बिगड़ने का कारण हमारा स्वार्थ पुर्ण व्यहार होता है, जिससे समाज मे ध्रवीकरण को बल मिलता है। भाव पुर्ण बिरोध बिकाश को प्रदर्शित करती है…
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निराशा की आग

निराशा की आग

निराशा की आग लॆख जीवन भी एक अजीव पहेली है। उम्मीदों का दामन थामे जब जिंदगी आगे बढ़ती रहती है तो फुर्सत कहां मिलता है कि इसके बिच किसी अनहोनी के बारे मे सोचें। आजकल का तो समय ही है कि अति क्षिण संभावना भी दिखे तो अपनी निगाहें जमाये रखो यानी सकारात्मक सोच को बनाये रखो। एक भौतिकतावादी मानव के मन के लिए यही सबसे बड़ी समस्या होती है कि उसे थोडी भी कष्ट की बात को सोचना पड़े तो वह अपना मुह मोड़ लेता है और जब अनहोनी होती है तो उसके लिए खुद को संभलना मुश्किल हो…
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पुतीन का कर्ज

पुतीन का कर्ज

पुतीन का कर्ज पुतीन के द्वारा कमाई जा प्रतीष्ठा मे एक और अध्याय जुड़ गया है। शक्तिशाली सम्राज्य के नायक का ये नया रुप जनमानस को टिस दे रहा है। मानवता को समझने का जो प्रयास संयुक्त राष्ट्र संघ के रुप मे स्थापित हुआ था आज वह खुद समझने मे लगा हुआ है। युक्रेण के युद्ध मे जो कुछ कमाई होगा उसका हकदार पुतीन ही होगें। क्योकि उनके उन्मादी बिचार पर ही मुहर लगी है। इसकी किमत इतिहास पुतीन से जरुर उसुलेगा। आज पुरे बिश्व मे एन्ग्री पुतीन के नाम से उनको सम्मान मिल रहा है। जवकी युद्द चल रहा…
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महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि लेख भगवान भोलेनाथ के बैराग्य को माता पार्वती ने अपने तपोवल की शक्ति से तोड़कर उनको अँगीकार कर लिया। भगवान ने जीव जगत वासी के लिए शायद यह लीला रची हो। लेकिन जनमानस के लिए आज भी उनका यह कार्य याद किया जा रहा है। कहते है कि पुजा तो गुण की ही होती है। माता पार्वती के आलौकिक दृष्टि मे शिव शक्ति के जो गुण दिखे हो। हम जगत वासी के विए तो उनके हर गुण महान ही दिखते है। काल तथा परिस्थिती के अनुरुप महादेव के शक्ति धारण तथा समस्या निवारण कि चर्चा समस्त ब्रम्हाण्ड मे चलती…
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अतिथि आये

अतिथि आये

अतिथि आये अतिथि का भी अपना एक गणित होता है जिससे उनका संयोग और बियोग बनता है। एक बार ऋषि दुर्वाशा अर्जुन के वन आश्रम मे पधारे। उनके एक भाई से भोजन का प्रबन्धन करने को कहकर अतिथि अपने साथी समेत वन मे ही स्नान को चले गये। इस बात की सुचना जब द्रोप्ती को हुई तो उनकी चिंतन बढ़ने लगी क्योकि घर मे सभी खाना खा चुके थे। फिर भी वह अपने भोजन के वर्तन को देखने गई। उसमे सिर्फ एक ही चावल था। इसी बिच भगवान कृष्ण अतिथि बनकर अपने भक्त के घर पहुँच गये। भक्त के भाव को…
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सुबोध जी का 26वॉ जन्मदिन

सुबोध जी का 26वॉ जन्मदिन

जन्मदिन के बधाई को बिचारोंं मे संग्रहित करना कठिन है। फिर भी एक रेखा तो खिंचनी होती है जिससे कि पथिक के आने वाले समय के बारे मे विश्वास तथा आशा बन्ध सके। वैसे तो विवेकी मानव स्वयं ही गुणित बिचारधारा मे उलझा रहता है। नित होने वाले परिवर्तन से उसको सामना करना पड़ता है। इसके बाद भी उसका निर्धारित लक्ष्य के तरफ बढ़ना यदि सतत जारी है तो उसे कर्मयोगी कह सकते है। कार्मयोगी का अपना विश्वास ही उसका सबसे बड़ा हथियार होता है, जिससे की वह अपने कर्म पथ को रौशन करता जाता है। आपका मार्ग शरीर से…
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गायत्री बन्दना

गायत्री बन्दना

गायत्री वंदना माता गायत्री की वन्दना से हम उनके दिव्य शक्ति को अपने अंदर जागृत करते है। दिव्य शक्ति को मंत्र उर्जा के रुप मे वेदो मे स्थान दिया गया है। चुकी मानव, भाव का एक युक्ति यंत्र है। इसकी सारी उर्जा इसके नाभी मे कुंडलीत रहती है, जो सुषुप्तावस्था मे विधमान रहती है। इस कुंडलीत उर्जा को जिस भाव के रुप मे हम क्रियांवयित करेगे, वैसा ही हमारे चित का स्वरुप हो जायेगा। इसलीए मंत्र शक्ति, माता गायात्री के एक एकात्म स्वरुप का भान करते हुए, उनके वेदमंत्रोयुक्त भाव के द्वारा, हम स्वयं को उर्जावान करते है। हमारी जागृत…
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लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि

लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि

लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि गुण कौशल की प्रखरता जब अपने मुकाम तक पहुँचती है, तो वह गुण धारक को रौशन कर देती हैैैै। उनका यात्रा बृतांत एक यादगार पल बन जाता है। असफल लोग या संधर्षरत लोगो को इस तरह के बिचार की बहुत जरुरत होती है, जिससे की उनकी कार्य उर्जा का प्रवाह बना रहे। मन कि दुर्वलता को दुर करने का यह एक शसक्त जरीया होता है। भारत के बौधिक सम्पदा मे इस तरह के अनेको उदाहरण मिलते है। समय की बली बेदी पर बनते बिगरते जीवन की दिव्य लिला को करिव से अऩुभव करने का एक संयोग…
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मॉ वरदान दो

मॉ वरदान दो

ज्ञान की तरलता से हम सब परिचित है। ज्ञान का स्वध्याय तुलनात्मक है। इसके कारण इसके धारण मे बिविधता देखने को मिलती है। बास्तविक ज्ञान की आज भी खोज जारी है। मानव का चंचल मन जहां तक तरंगित हो पाता है हमारी जानकारी वही जाकर सिमित हो जाती है। मानव के मन के स्थिर करने तथा सुखमय जीवन निर्वाह के आगे हम सोच भी नही रहे।     ये अनन्त आकाश आज भी हमारे सोच से परे है। जब ये भाव मन मे आता है तो मन गुणित होने लगता है। इस गुणित मन को व्यवस्थित करने का योग जिसे मिलता…
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