Poem

मामा जी की 45 वाँ एनिवर्षरी

मामा जी की 45 वाँ एनिवर्षरी

मामा जी की 45 वॉ एनिवर्षरी एनिवर्शरी को मनाने का सामान्य प्रचलन भारत मे नही है। फिर भी समय के साथ लोगो को इसमे दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। तनाव भरी जिवन के आजकल के इस दौर मे लोगो को कुछ समय मिल जाता है जब लोग सब कुछ भुलाकर अपनी एक नयी रंग मे रंग जाते है। खुशीयोँ को ताजा करने का यह चलन स्वभाविक रुप से बड़ा आनन्दायक होता है। छनभंगुर जिवन के एक-एक वर्ष की खुशीयाों का सौगात अपनो के साथ बांटनाा एक अलग ही सुखद एहसास देता है।          जिवन की नइया के पार जाते एक-एक…
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माँ दुर्गा और युद्ध भूमी

माँ दुर्गा और युद्ध भूमी

मां दुर्गा के युद्ध भुमी सामाजिक न्यायिक जिवन निर्वाह के लिए सामाजिक जिवन का ताना-बाना को समझना तथा उसके अनुरुप अपने को ढ़ालकर कार्य करने की कला बिकसित करनी होती है। सामाज मे एक साथ कई घटना घटित होती है। सभी घटना को समझना तथा उसके अनुरुप चलना कठिन कार्य है। हमें कोई एक दिशा अपना तय करना होता है। जिसके सहारे हम आगे बढ़ते है। यही दिशा हमरे जिवन को एक अर्थ देता है। यह दिशा कौन हो इसका सही प्रारुप क्या हो इसी बात को समझने के लिए हम समाज मे घटित होने वाले घटना को समझना को…
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भाभी के साथ रंग

भाभी के साथ रंग

भाभी के साथ रंग होली हिन्दुओ का एक प्रसिद्ध पर्व है जिससे आपसी बिद्वेश को कम करने के रुप मे देखा जाता है। इससे एक पौराणिक कथा भी जुड़ा हुआ है। जिसमे होलिका का अंत हो जाता है तथा प्रहलाद को जिवन दान मिलता है। व्यवहारिक रुप मे होली आपसी भेदभाव को मिटाने का माध्यम है। रिस्ते की बात की जाती है, तो देवर भाभी के रिस्ते का नोक-झोक देखते ही बनता है। इसी भाव के व्यक्त करता यह काव्य रचना पुरी रंग मे रचा गया है। आजकल हमारा नजरीया खुलापन के साथ आपसी विश्वास को दर्शाता है, जो रिस्ते…
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बिर्रो

बिर्रो

बिर्रो उमंग उल्लास मे बितता जीवन जब एक नये दौर मे पहुँचता है, तो उसका सुखद एहसास गहरा तथा अति व्यक्तिगत होता है। इस नाजुकता को समझ पाना आसान नही है। इसका बर्णन तो काव्य रुप मे ही किया जा सकता है, जिससे की इसकी प्रखरता का अनुमान लगाया जा सके। आजकल बहुत कम लोग होते है, जो ऐसी उड़ान का आनन्द लेना पसंद करते है। अधिकांश लोग तो सोर सरावा मे इस तरह खो जाते है कि उनको वास्तविकता का एहसास ही नही होता है। वह लगतार ही यह खोजता रहता है कि आखिर इस छनिक एहसास का मुल…
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प्यारी भाभी

प्यारी भाभी

देवर भाभी का आधुनिक समाज मे रिस्ते मे तल्खी देखने को मिलती है। बिज्ञान के विकाश के साथ ही बिश्वास की अवधारणा भी बदलने लगा है। रामायण काल के सामाज मे भाभी को मां का दर्जा दिया जाता था। लेकिन महाभारत मे इसकी परिभाषा बदल गई। द्रौपदी पाँच भाई से शादी करके इस रिस्तो को नया मुकाम दिया। आधुनिक काल मे मानव समाज के नित्य बदलते व्यवहार से नयी नयी सोच के साथ रिस्तो को टुटते बनते देखते है। लेकिन आज भी एक स्वस्थ्य समाज मे देवर भाभी के अनेखे रिस्ते देखने को मिलता है। परिवार को राष्ट्र के विकाश…
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पहला सोमबारी

पहला सोमबारी

पहला सोमबारी यह बिशेष पर्व सावन की शुरुआत के साथ हर सोमबार को शिव आराधना के शुरु होता है। सावन के समय होने वाले मौसम मे बदलाव के कारण जो बिकार मानव शरीर में पैदा होता है उसे व्यवस्थित करने के लिए यह पर्व बड़ा ही उत्तम है। साधना से शक्ति आती है और शक्ति ही भक्ति का मुलभाव होता है। मन को शिव की गाथा के साथ चिंतन मनन का दैर चलता रहता है। एक भाव मे रहकर मन को स्थिर रखना एक कलात्मक योग है। यहि साधना हमे जीवन मे बिकास के मार्ग को खोलता है। जीवन मे…
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नफरत का फल

नफरत का फल

नफरत का फल नफरत व्यक्ति को अंधा बना देता है, व्यक्ति की मानसिक स्थिति पुरी तरह बदल जाती है। वह अपनी बैचारिक सिमा के बाहर नही जा पाता है। उस सिमा के बाहर जाकर सोचना उसके लिए अत्यंत दुखद होता है। दुख के इस बंधन के पार जाकर सोचना तथा उसका निदान निकालना नही चाहता है क्योकि बह अपनी बर्तमान सोच को ही अंतिम सोच मान लेता है। व्यक्ति कभी पुरा घटना चक्र को अनजान बनकर नही सोचता है, बल्कि बह उसका हिस्सा बनकर रह जाता है। आनेवाली समस्या के जानकर होने के बाबजुद बह अपनी सही हल नही निकाल…
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दोस्ती का सफर- श्रधांजली

दोस्ती का सफर- श्रधांजली

यह संकलन हमारी दोस्ती सफर के अंतहीन कहानी को कहता एक संकलन है जिसका यहां बर्णन है। दोस्ती की यादगार पल को सावित करने वाली कविता एक अनुपम उपायेदान है। दोस्ती को श्रधांजली देना एक कठिन पल है क्योकि उनका साथ कई अनसुलझे पहलु को सही रुप से देखने तथा उसपर बीचार करने के कुशल अनुरोध जो मिलता था वह अनुपम संयोग होता था। आज ओ पर नही है पर उनता याद हमे उनकी कमी को दर्शाता है। जिसका निरुपन यहां किया जा रहा है। कविता के रुप मे यहां हम अपना बिचार कविता के रुप मे रख रहे है।…
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दोस्त को  श्रधांजली

दोस्त को श्रधांजली

दोस्त की श्रधांजली दोस्त आपकी सम्पुर्ण यादो को पुर्ण रुप से  संकलन करना संभव नही है लेकिन आपके यादो को एक रुप देकर आपनो तक संदेशा पहुंचाना जरुरी है। ताकि सबके भाव एक दुसरे मे समाहित हो जाये। हमारे द्वारा यह काव्य संकलन इसीमे किया गया एक छोटा सा प्रयास है। दोस्त के खालीपन को भरना संभव नही है। क्योकि बिता कल वापस नही आता बस आती है तो जाने बाले की यादे। ये ओ दौलत है जो एक दोस्त को एक-दुसरे से अलग करता है। यादो का भंडाक दोस्ती की सौगात होती है। जिसमे हम बिते पल को फिर…
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